Sunday, July 5, 2009

दूर रहकर भी मेरे पास हो तुम

दूर रहकर भी मेरे पास हो तुम।
जिसको ढूंढू वही तलाश हो तुम।

प्यार जो पहली-पहली बार हुआ,
मेरे उस प्यार का अह्सास हो तुम।

इस जहाँ में बहुत से चेहरे हैं,
इन सभी में बहुत ही खास हो तुम।

तेरा-मेरा मिलन तो फिर होगा,
ऐ मेरे यार क्यों उदास हो तुम।

तुमसे ही मेरी हर तमन्ना है,
मेरी हसरत हो मेरी आस हो तुम।

13 comments:

  1. बहुत ही अच्छी रचना है

    ---
    तख़लीक़-ए-नज़र

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  2. दूर रहकर भी मेरे पास हो तुम।
    जिसको ढूंढू वही तलाश हो तुम।

    वाह जी ....बड़ी खुशी हुई आपकी तलाश पूरी हुई ....लाजवाब शे'र ....!!!

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  3. kya baat hai prassan ji...... bahut achha laga padhkar

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  4. waah..
    pyar bhara, ek sukhad ehsaas bhara prsatuti
    badhayi..bahut achchi lagi aapke geet

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  5. prem chalkati ik khoobsurat rachna
    bahut badhaii.

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  6. मेरे ब्‍लाग पर आपके प्रथम आगमन के लिये अभिनन्‍दन,

    तुमसे ही मेरी हर तमन्ना है,
    मेरी हसरत हो मेरी आस हो तुम।

    हर पंक्ति बहुत ही लाजवाब, बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  7. "तुमसे ही मेरी हर तमन्ना है,
    मेरी हसरत हो मेरी आस हो तुम।"

    वाह...वाह....!
    बहुत सुन्दर,
    बधाई।

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  8. pyar bhare ahsaas liye khubsurat gazal!
    shukriya

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  9. 'तेरा-मेरा मिलन तो फिर होगा,
    ऐ मेरे यार क्यों उदास हो तुम।'
    - यह आत्म विश्वास ही प्रेम का संबल है.

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  10. बहुत खूब कहा चतुर्वेदी जी
    बहुत प्यारी रचना !
    हार्दिक बधाई !
    मेरे दुसरे ब्लॉग पर प्रथम आगमन का शुक्रिया . कभी मेरे पहले ब्लॉग पर भी पधारे
    www.bebkoof.blogspot.com

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  11. तेरा-मेरा मिलन तो फिर होगा,
    ऐ मेरे यार क्यों उदास हो तुम।
    ... bahut khoob !!!!!

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  12. तेरा-मेरा मिलन तो फिर होगा,
    ऐ मेरे यार क्यों उदास हो तुम।
    वाह अजा आ गया चतुर्वेदी जी बधाइयां

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